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बहराइच में लोगों ने भेड़िया के बच्चे को पहुंचाया नुकसान, आदमखोर भेड़ियों ने 8 लोगों को मारा 36 घायल
- SADDAM HUSEN Editor in Chief
- 04 Sep, 2024
बहराइच में आदमखोर भेड़िये यूं ही नहीं कर रहे लोगों पर हमला
-विशेषज्ञों ने कहा- भेड़ियों के बच्चों को नुकसान पहुंचाया इसलिए ले रहे बदला
लखनऊ,(एजेंसी)। भेड़ियों के हमलों से यूपी के बहराइच जिले के लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। बरसात के मौसम में हमले बढ़े हैं और जुलाई से लेकर अब तक इन हमलों से सात बच्चों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो चुकी है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत करीब 36 लोग घायल हुए हैं। बहराइच के महसी तहसील क्षेत्र में भेड़ियों को पकड़ने के लिए थर्मल ड्रोन और थर्मो-सेंसर कैमरे भी लगाए गए हैं। वहीं देवीपाटन के मंडलायुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने कहा कि अगर आदमखोर भेड़िये पकड़ में नहीं आते हैं और उनके हमले जारी रहते हैं, तो अंतिम विकल्प के तौर पर उन्हें गोली मारने का आदेश भी दे दिया गया है। इन आदमखोर भेड़ियों के बढ़ते हमलों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि भेड़िये बदला लेने वाले जानवर होते हैं। पिछली घटनाओं में देखा गया है कि लोगों ने भेड़ियों के बच्चों को नुकसान पहुंचाया था और इसके बाद भेड़िए आदमखोर हो गए। विशेषज्ञ के मुताबिक यही पैटर्न इस बार भी देखा जा रहा है। एक्सपर्ट कहते हैं कि पूर्व में इंसानों द्वारा उनके बच्चों को नुकसान पहुंचाए जाने के बदले में ये हमले किए जा रहे हैं।
आईएफएस के रिटायर्ड अधिकारी ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि भेड़ियों में बदला लेने की प्रवृत्ति होती है और पूर्व में इंसानों द्वारा उनके बच्चों को किसी ने किसी तरह का नुकसान पहुंचाया होगा या फिर मार दिया होगा जिसके बदले के तौर पर ये हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20-25 साल पहले यूपी के जौनपुर और प्रतापगढ़ जिलों में सई नदी के कछार में भेड़ियों के हमलों में 50 से ज्यादा मासूम बच्चों की मौत हुई थी। जांच करने पर पता चला था कि कुछ लोगों ने भेड़ियों की मांद में घुसकर उनके दो बच्चों को मार दिया था। भेड़िया बदला लेता है और इसीलिए उनके हमले में इंसानों के 50 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। बहराइच में भी कुछ ऐसा ही मामला लगता है। उन्होंने कहा कि इसी साल जनवरी-फरवरी में बहराइच में भेड़ियों के दो बच्चे ट्रैक्टर से कुचलकर मर गए थे। तब उग्र हुए भेड़ियों ने हमले शुरू किए तो हमलावर भेड़ियों को पकड़कर 40-50 किलोमीटर दूर चकिया जंगल में छोड़ दिया गया। संभवतः यहीं गलती हुई… सिंह ने बताया कि चकिया जंगल में भेड़ियों के लिए नेचुरल स्टे नहीं है। ज्यादा संभावना यही है कि यही भेड़िये चकिया से वापस घाघरा नदी के किनारे अपनी मांद के पास लौट आए हों और बदला लेने के लिए हमलों को अंजाम दे रहे हों। वहीं बहराइच के प्रभागीय वन अधिकारी अजीत प्रताप सिंह का कहना है कि ‘शेर और तेंदुओं में बदला लेने की प्रवृत्ति नहीं होती, लेकिन भेड़ियों में होती है। भेड़ियों की मांद से कोई छेड़छाड़ होती है, उन्हें पकड़ने या मारने की कोशिश होती है या फिर उनके बच्चों को किसी तरह का नुकसान पहुंचाया जाता है, तो वे इंसानों का शिकार कर बदला लेते हैं।
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