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Hamirpur UP -: अखिल भारतीय मुशायरे में शायरों ने पेश किए शानदार नज्में
- Mohammad Amir
- 10 Nov, 2024
हमीरपुर ब्यूरो :–
विख्यात सूफी संत हज़रत बाबा निज़ामी के उर्स के मौके पर रविवार को बाबा के आस्ताने में शानदार आल इंडिया नातिया व मन्कबती मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसकी सदारत दरगाह के सज्जदा नशीन हाफिज़ वली मोहम्मद निजामी व हाफिज़ लाल मोहम्मद निजामी ने की वहीं मुशायरे का संचालन डॉ माजिद देवबंदी ने किया।
रविवार को बाबा निजामी के सालाना उर्स के पहले दिन देर रात आस्ताने में शानदार आल इंडिया नातियां मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें दूर दराज से आए मेहमान शायरो ने अपने कलाम से महिफल में चार चांद लगा दिए। वहीं मुशायरे सुनने के लिए कस्बा सहित आस-पास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रोतागण दरगाह पहुंचे और शायरों के प्रत्येक शेरों को दाद देकर नवाज़ा। मुशायरे में दिग्गज नातियां शायर रही बस्तवी के इस शेर को जमकर दाद मिली 'ज़िक्रे नबी जो करते हैँ ज़िक्रे खुदा के बाद - महशर के रोज़ होंगे मेरे मुस्तफा के साथ', इसी तरह जमील खैराबादी ने अपने इस शेर पर खूब दाद बटोरी 'ज़रूर तुमको मदीने बुलाएंगे आका - हयात जैसे भी गुज़रे गुज़ारते रहना' वहीं मसीह निज़ामी मौध्वी का ये शेर खूब पसंद किया गया 'जो ज़बा न करे ज़िक्रे सल्ले अला - मुंह को ऐसी जबां की ज़रूरत नहीं - जिन नमाज़ों में इश्के शहे दीं न हो ऐसे सजदों की कोई फ़ज़ीलत नहीं' इसी क्रम में काविश रुदौलवी ने अपने इस शेर पर खूब दाद बटोरी 'लौटाने अमानत मेरी बुलवाए वो दोबरा - मैं जान के भूल आऊं सामान मदीने में'। संचालन कर रहे डाॅ माजिद देवबंदी का ये शेर बेहद पसंद किया गया 'जिस पे सरकारे दोआलम की नज़र हो जाय - वो बशर मिस्ले अबु बकरो उमर हो जाय। वहीं वसीम रामपुरी के इस शेर पर श्रोताओं ने जम कर दाद दी 'दिल में उतरने लगता है चेहरा हुज़ूर का - जब देखता हूँ गुम्बदे खज़रा हुज़ूर का' कलंदर निज़ामी ने पढ़ा ' वंहा की शामो सहर देखने को मिल जाय - मुझे हुज़ूर का दर देखने को मिल जाय। नातियां मुशायरा देर रात तक बड़ी कामयाबी के साथ चलता रहा और श्रोताओं की चर्चा रही के ऐसा ऐतिहासिक नातियां मुशायरे अभी तक मौदहा की सरजमीं पर नहीं सुना गया।
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